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दैनिक परीक्षा डेस्क भारत

अनुभाग: व्याख्या

कॉमर्स स्टूडेंट्स के लिए सरकारी परीक्षा, स्तर के हिसाब से

B.Com ग्रेजुएट किन सरकारी परीक्षाओं में बैठ सकता है, कौन सी परीक्षाएं असल में कॉमर्स या फाइनेंस बैकग्राउंड को तरजीह देती हैं, और कौन सी किसी भी विषय के लिए खुली हैं।

संपादकीय डेस्क

प्रकाशित

8 मिनट का पाठ

कॉमर्स स्टूडेंट्स के लिए सरकारी परीक्षा (commerce students ke liye sarkari exam) खोजने वाला B.Com ग्रेजुएट अक्सर एक छोटी, खास सूची की उम्मीद करता है, ऐसी परीक्षाएं जो नाम से कॉमर्स की डिग्री मांगें और बाकी सबको बाहर रखें। वह सूची छोटी इसलिए है क्योंकि वह लगभग खाली है। असल में जो मौजूद है वह किसी भी विषय के लिए खुली परीक्षाओं का एक बड़ा समूह है, जहां कॉमर्स बैकग्राउंड एक असली बढ़त बन जाता है, बैंकिंग, इंश्योरेंस और वित्तीय नियामक क्षेत्र इसके सबसे साफ उदाहरण हैं, साथ में कुछ ऐसे पद भी हैं जो कॉमर्स या उससे जुड़ी योग्यता को नाम लेकर मांगते हैं। यह फ़र्क पहचानना अधिसूचना पढ़ने का तरीका बदल देता है, आप ऐसी विषय-पाबंदी ढूंढना बंद कर देते हैं जो ज़्यादातर मौजूद ही नहीं होती, और इसके बजाय यह तौलना शुरू करते हैं कि कहां आपकी डिग्री बढ़त देती है और कहां कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

ग्रेजुएशन के बाद कौन सी सरकारी परीक्षाएं पूरी स्नातक स्तर की सूची को भर्ती संस्था के हिसाब से बांटता है, विषय के हिसाब से नहीं। यह लेख उस सूची को कॉमर्स ग्रेजुएट के लिए सबसे पहले देखने लायक परीक्षाओं तक सीमित करता है, और साफ बताता है कि इनमें से कौन सी असल में कॉमर्स से जुड़ी योग्यता मांगती हैं और कौन सी किसी भी डिग्री के लिए खुली हैं और बस उसे तरजीह देती हैं।

बैंकिंग स्तर: किसी भी विषय के लिए खुला, पर पाठ्यक्रम कॉमर्स को फ़ायदा देता है

इस साइट पर जिन बैंक भर्तियों की पात्रता जांची जा चुकी है, उन सबको किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री चाहिए, अधिसूचना में कहीं भी कॉमर्स की कोई शर्त लिखी नहीं मिलती। IBPS PO, SBI PO और IBPS क्लर्क, तीनों एक ही तरह से लिखते हैं, किसी भी विषय, बस इतना। कॉमर्स ग्रेजुएट को पात्रता के पन्ने पर कोई खास तरजीह नहीं मिलती।

जहां कॉमर्स बैकग्राउंड मदद करता है वह है खुद परीक्षा। क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, रीज़निंग और जनरल व फाइनेंशियल अवेयरनेस इन पेपरों के आम हिस्से हैं, और B.Com के पाठ्यक्रम, अकाउंटिंग, इकॉनॉमिक्स, बिज़नेस स्टडीज़, से फाइनेंशियल अवेयरनेस वाले हिस्से में एक ऐसा उम्मीदवार जिसका बैकग्राउंड इससे जुड़ा नहीं है, उससे आगे की शुरुआत मिल जाती है। यह तैयारी की बढ़त है, पात्रता की नहीं, और यह फ़र्क तब मायने रखता है जब आप यह तय कर रहे हों कि आपको आवेदन करने की इजाज़त है या नहीं, बनाम आप परीक्षा पास करने के लिए कितने तैयार हैं।

इंश्योरेंस स्तर: वही पैटर्न, साथ में कुछ नामित स्पेशलिस्ट स्ट्रीम

इंश्योरेंस सेक्टर की भर्ती भी लगभग इसी ढांचे पर चलती है। LIC AAO को अपनी जनरलिस्ट स्ट्रीम के लिए किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री चाहिए। इस साइट पर जिन बाकी सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की पात्रता जांची गई है, NIACL, NICL और OICL, उनकी जनरलिस्ट स्ट्रीम पर भी यही शर्त है, किसी भी विषय, आमतौर पर अधिसूचना में बताए गए न्यूनतम प्रतिशत के साथ।

इस स्तर में अपवाद स्पेशलिस्ट स्ट्रीम है, जिसे कई बीमा कंपनियां उसी अधिसूचना में जनरलिस्ट भर्ती के साथ चलाती हैं। लीगल, IT, एक्चुएरियल, मेडिकल या अकाउंट्स की स्पेशलिस्ट पोस्ट को उसी से जुड़ी पेशेवर योग्यता चाहिए, कोई कॉमर्स डिग्री विशेष रूप से नहीं, इसलिए कॉमर्स ग्रेजुएट स्पेशलिस्ट पोस्ट के लिए अपने आप उतना योग्य नहीं होता जितना जनरलिस्ट पोस्ट के लिए है। सिर्फ परीक्षा का नाम नहीं, बल्कि आप किस स्ट्रीम में आवेदन कर रहे हैं वह पढ़िए, इससे पहले कि आप मान लें कि पात्रता की लाइन आप पर लागू होती है।

वित्तीय नियामक स्तर: जहां शर्त असल में बदल जाती है

यह स्तर ध्यान से पढ़ने लायक है, क्योंकि यह वह जगह है जहां “कॉमर्स ग्रेजुएट” होना संयोग नहीं रह जाता, कुछ पदों पर यह एक असली योग्यता की शर्त बन जाता है, सबके लिए नहीं।

SEBI ग्रेड ए कई स्ट्रीम में भर्ती करता है, जनरल, लीगल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और कुछ और, हर एक को उस स्ट्रीम से जुड़े विषय में स्नातक की डिग्री चाहिए। जनरल स्ट्रीम के लिए जुड़े विषयों में इकॉनॉमिक्स और कॉमर्स से मिलते-जुलते विषय भी शामिल हैं, इसलिए यह मान लेने के बजाय कि जनरल का मतलब कोई भी डिग्री चलेगी, मौजूदा अधिसूचना की स्ट्रीम टेबल ही पढ़िए।

NABARD ग्रेड ए भी वही स्ट्रीम वाला ढांचा चलाता है, जनरल, एग्रीकल्चर, इकॉनॉमिक्स, स्टैटिस्टिक्स और इंजीनियरिंग स्ट्रीम, हर एक की अपनी योग्यता लाइन, जनरल स्ट्रीम ज़्यादा खुली और स्पेशलाइज़ेशन वाली स्ट्रीम उस नामित विषय से बंधी हुई।

SIDBI ग्रेड ए इस सूची में सबसे साफ मामला है जहां परीक्षा नाम लेकर कॉमर्स को तरजीह देती है। इसकी जनरल स्ट्रीम को कॉमर्स, इकॉनॉमिक्स, मैथमेटिक्स, स्टैटिस्टिक्स, बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन या इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री चाहिए, एक तय न्यूनतम प्रतिशत के साथ, या इसके बदले कंपनी सेक्रेटरी, कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट, चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट या चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसी पेशेवर योग्यता, या किसी भी विषय में MBA या PGDM। एक सीधी B.Com डिग्री, ज़रूरी प्रतिशत के साथ, यह शर्त सीधे पूरी कर देती है, जो इस सूची की ज़्यादातर परीक्षाओं में सच नहीं है।

IRDAI ग्रेड ए और PFRDA ग्रेड ए भी SEBI और NABARD जैसा ही ढांचा अपनाते हैं, एक जनरल या किसी भी ग्रेजुएट के लिए खुली स्ट्रीम के साथ साथ एक्चुएरियल, लीगल, IT, रिसर्च या राजभाषा जैसी नामित योग्यता वाली स्पेशलिस्ट स्ट्रीम भी चलती हैं। आप किस स्ट्रीम को पढ़ रहे हैं यह तय करने से पहले कन्फर्म कर लीजिए कि कॉमर्स डिग्री आपको योग्य बनाती है या नहीं, क्योंकि जनरल स्ट्रीम की भाषा और स्पेशलिस्ट स्ट्रीम की भाषा एक ही अधिसूचना में भी अलग अलग शर्तें होती हैं।

छोटे में कहें तो, इस पूरे स्तर की ज़्यादातर परीक्षाएं किसी भी विषय के लिए खुली परीक्षाएं हैं जिन पर ऊपर से नामित स्पेशलाइज़ेशन जोड़ दी गई हैं, कॉमर्स-केवल परीक्षाएं नहीं। SIDBI की जनरल स्ट्रीम इस सूची की वह अकेली जगह है जहां कॉमर्स डिग्री खुद योग्यता की शर्त में लिखी गई है, साथ में कुछ पेशेवर फाइनेंस योग्यताएं भी जिन्हें B.Com ग्रेजुएट ग्रेजुएशन के बाद अच्छी तरह हासिल कर सकता है।

जो पैटर्न याद रखने लायक है

बैंकिंग, इंश्योरेंस और वित्तीय नियामक तीनों में बार बार दोहराई गई पात्रता लाइन है “किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री”, “कॉमर्स में स्नातक की डिग्री” नहीं। कॉमर्स ग्रेजुएट इस सूची की किसी भी परीक्षा से बाहर नहीं है, और ज़्यादातर के लिए कोई खास तरजीह भी नहीं पाता। इस पूरे स्तर पर कॉमर्स ग्रेजुएट के पास जो असली बढ़त होती है वह है विषय की जान-पहचान, बैलेंस शीट, इंटरेस्ट कैलकुलेशन, फाइनेंशियल-मार्केट की शब्दावली, जो फाइनेंशियल अवेयरनेस और क्वांटिटेटिव सेक्शन की तैयारी का समय छोटा कर देती है। इसे तैयारी की बढ़त मानिए, पात्रता अधिसूचना से ही कन्फर्म कीजिए, और वहां स्ट्रीम मैच मान मत लीजिए जहां अधिसूचना कुछ नहीं कहती।

फाइनेंस से आगे भी किसी भी विषय वाले विकल्प

कॉमर्स ग्रेजुएट सिर्फ फाइनेंस सेक्टर की भर्ती तक सीमित नहीं है। SSC CGL को किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री चाहिए और यह बैंकिंग या इंश्योरेंस से पूरी तरह अलग, केंद्र सरकार के कई तरह के पदों पर भर्ती करता है। UPSC की सिविल सेवा परीक्षा भी वही किसी भी विषय वाली योग्यता रखती है और IAS, IPS, IFS और बाकी केंद्रीय सेवाओं तक ले जाती है। इनमें से कोई भी कॉमर्स बैकग्राउंड को उस तरह तरजीह नहीं देता जैसे वित्तीय नियामक स्तर देता है, पर दोनों कॉमर्स ग्रेजुएट के लिए फाइनेंस सेक्टर से बाहर करियर बनाने के जायज़ विकल्प हैं, और सिर्फ इसलिए इन्हें छोड़ देना कि “मैं कॉमर्स स्टूडेंट हूं” एक गलती होगी, योग्यता की लाइन इस बात की परवाह नहीं करती कि आपने क्या पढ़ा है।

इस सूची को अपने लिए कैसे छोटा करें

  1. यह तय कीजिए कि आप किस स्ट्रीम में आवेदन करेंगे, जनरल, जनरलिस्ट या कोई नामित स्पेशलाइज़ेशन, क्योंकि एक ही अधिसूचना के भीतर भी योग्यता स्ट्रीम के हिसाब से बदलती है, और यही तय करता है कि सीधी कॉमर्स डिग्री शर्त पूरी करती है या नहीं।
  2. जो परीक्षाएं योग्यता के फ़िल्टर से निकल आईं, उन सबकी उम्र सीमा और श्रेणी की छूट जांचिए। आयु छूट कैसे काम करती है पढ़िए, और साल हाथ से गिनने के बजाय परीक्षा की “आयु इस तिथि को” वाली तारीख आयु कैलकुलेटर में डालिए।
  3. तैयारी की बढ़त और पात्रता को अलग अलग तौलिए। IBPS PO के लिए योग्य होना और उसके फाइनेंशियल अवेयरनेस सेक्शन में आगे होना दो अलग बातें हैं, और इन्हें मिला देने से आप रीज़निंग और इंग्लिश जैसे उन हिस्सों की तैयारी कम कर बैठते हैं जो कॉमर्स से जुड़े नहीं हैं।
  4. योग्यता और उम्र से सूची छोटी होने के बाद ही बची हुई परीक्षाओं के पैटर्न और साइकल की तुलना कीजिए। सरकारी परीक्षा की तैयारी कैसे करें में लक्ष्य तय करने के बाद के पाठ्यक्रम मैपिंग और मॉक टेस्ट की योजना दी गई है।

अधिसूचना से मिलान हमेशा कीजिए

योग्यता की शर्तें, स्ट्रीम की परिभाषा और न्यूनतम एग्रीगेट बदलते रहे हैं, परीक्षा दर परीक्षा और चक्र दर चक्र, और एक स्पेशलाइज़ेशन स्ट्रीम अगले चक्र में जोड़ी, बदली या हटाई जा सकती है। ऊपर लिखी हर बात इस साइट पर प्रकाशन के समय हर परीक्षा के लिए जांची गई पात्रता को दिखाती है। यहां नाम ली गई किसी भी परीक्षा के लिए तैयारी में समय लगाने से पहले, उसकी मौजूदा अधिसूचना का पात्रता खंड कराने वाली संस्था की अपनी साइट पर पढ़िए, इस लेख या किसी और द्वितीयक स्रोत पर नहीं।

विषय

  • eligibility
  • basics

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